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Dawn of Debates - Tribute to 3 Indian role models of Oratory and Speeches

With the untimely demise of Shri. Arun Jaitely, dawn of articulated debates in Indian democracy has arrived. The 21st century youngsters never had the honour of listening to the speeches of the Mahatma, 'Tryst with destiny' of Pt. Nehru, parliamentary debates of Baba Sahah or Inspiring and patriotic speeches of Netaji. They weren't fortunate enough to witness sharp and accurate criticism of government by Dr. Shyama Prasad Mukherjee and even JP's patient and silent heartthrobing speeches after emergency. But this generation had glimpses of most poetic orator with an ever energetic pause in his speeches delivered by Prime minister Shri. Atal Bihari Vajpayee Ji. The generation is fortunate to have YouTube clips of Atal Ji's roar in the parliament while announcing his resignation. A speech followed by the resignation can never be historical as it was. The prowess in the voice, the pauses, the conviction, the determination to come back again and the promise to his pe...

यात्रीगण कृपया ध्यान दें -३

उत्तर प्रदेश के डी.एन.ए में अगर कोई एक बात कूट कूट के भरी हुई है तो उसका नाम है राजनीति। राजनीतिक चर्चा , उत्तरप्रदेश और यूपी में रेल यात्रा ये ऐसा समीकरण है कि कोई भी महागठबंधन इसके आगे पानी पानी हो जाए। गाड़ी संख्या १४२५८ वाराणसी से चल के नई दिल्ली को जाने वाली काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस में सफर का मज़ा कुछ और है क्योंकि जितनी राजनीतिक चर्चा और भाषणबाजी इस सफर में होती है उतनी दिल्ली स्थित संसद में हो जाए तो देश सुधर जाए। हमारी कालीन नगरी भदोही के रेलवे स्टेशन में आने से पहले ट्रेन एक घंटे विलंब से आयी । बड़े भइया से विदा लेते हुए मैं और मेरे मित्र इंजिनियरिंग आखिरी वर्ष के आखिरी चरण की लड़ाई के लिए अपने रथ पे सवार हो गए। सीट संख्या ५९ और ६२ पे चढ़ गए। मालूम पड़ा हमारे नीचे आंध्र से उत्तर भारत दर्शन को चले कुछ यात्रियों का जत्था है। मैं तेलुगु भाषा से परिचित था तो उनकी बातें समझ सकता था पर बाकी लोग उन्हें मंगल ग्रह के प्राणी की तरह देखकर अपने काम में वापस लग जा रहे थे। नीचे बैठी महिलाएं हमारे यहां ट्रेंड से बाहर जा चुकी बनारसी साड़ियों का अंबार लगाई हुई थी और उसी की चर्चा में व्यस्त ...

हेराई ग फागुन

अबकी बरसिया सुखाई गा फागुन , शहरीया के शोर में हेराई गा फागुन । माई के हाथे का पेड़किया हेरान बा , बाबू क उजरकी धोतीया हेरान बा , ललकी बुकनिया क लाली हेरान बा , उबटन औ गेहूं के बाली हेरान बा । अबकी बरसिया सुखाई गा फागुन , शहरीया के शोर में हेराई गा फागुन । अम्मा के मोहे क मुस्की हेरान बा , बाबा के चाये क चुस्की हेरान बा , हेरत बायेन सगरों सुरती क पुड़िया , बेटवा हेरान बा, हेरान बा पतोहिया । अबकी बरसिया सुखाई गा फागुन , शहरीया के शोर में हेराई गा फागुन । आवत होइन्हे भईया फगुआ नियरान बा , रिजर्वेशन टिकटिया क कबे करान बा , बना बा पेड़किया औ बरा बना बा , गठियाय देब उन्है भदैइला क फांकी बना बा । अबकी बरसिया सुखाई गा फागुन , शहरीया के शोर में हेराई गा फागुन । नतिया खॆलाए बड़ा दिन भवा बा , औ कपड़ा सिआए बड़ा दिन भवा बा , अबकी बेरी छोटकु बुसैट ली आईहें , हफ्ता भर रहिहें , तबई वापस जईहें । अबकी बरसिया सुखाई गा फागुन , शहरीया के शोर में हेराई गा फागुन । फगुआ बदली के अब होली भवा बा , चाहे बहुत पर ना छुट्टी मिला बा , टांगे हयी बैगा , जात बाई दफ्तर , शहरिया मे...

दो गठरियां ।

ये कहानी है एक ऐसे खूबसूरत मुल्क की जो सदियों तक एक रहा , एक एहसास , एक जज्बात । उसकी पहली रेल यात्रा इस प्रकार का दर्द देगी उसे ये पता नहीं था । मुल्तान में पैदा हुआ था वो एक सिख प...

यात्रीगण कृपया ध्यान दें ...

सुबह के चार बजकर पचपन मिनट हो रहे हैं , पिताजी की ४ मिस कॉल हो चुके हैं और दिल्ली की कंपकपाती ठंड की सुबह मेरे मित्र और मैं सड़क पे खड़े हो कर  कैब बुक कर रहे हैं , देर ना हो जाए इसलिए पहले निकल रहे हैं स्टेशन के लिए , ६:२५ की आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस पकड़  के  विशाखापट्टनम जो जाना है पिता और मां के  पास । जैसे तैसे ९८ रुपए की कैब बुक हुई और अपने मित्र को गले लगाकर विदा लेते हुए कैब में बैठे । शुरुआत में मुस्कुराते हुए मन ही मन दोस्त के साथ हुई रात २ बजे तक की बातें याद की और सोचा की दोस्त और दोस्ती कितनी खास होती है कि नींद भूलकर बस पुराने दिन याद करते हैं तभी ड्राइवर ने मेरा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा कि कहा से हो भाई , बातों बातों में पता चला कि देश के हर नागरिक की दिली ख्वाहिशें कितनी खास होती हैं और हर दिल क्या कहता है । पूरे २५ मिनट तक ड्राइवर मुझे देश में  सारे सुधार की गुंजाइश बताई और मन ही मन ये इच्छा भी जाहिर कर दी कि वो देश का प्रधामंत्री होता तो क्या करता - बढ़िया लगा कम से कम जो काम विपक्ष के नेता नहीं कर पाते वो आम नागरिक तो बोल देता है । ...

दिल की बातें

रेलगाड़ी और घर के प्यार के बीच एक गहरा संबंध होता है । घर की याद बाहर रहने वाले लोगों को हमेशा ही सताती है चाहे बाहर रहने वाला व्यक्ति कितने भी मजबूत हृदय वाला क्यों ना हो । मेरी दादी से जुड़ी कुछ यादें जिनमें मेरे बचपन में जब मैं छोटा हुआ करता था तो मेरे जन्मदिन पर उनके द्वारा तिलक लगा के और आरती उतार करके जन्मदिन मनाया जाता था । उस समय इन चीज़ों की इतनी एहमियत नही पता थी । कुछ दिनों पहले मेरी डिग्री के इस अंतिम वर्ष में मुझे ख्याल आया कि क्यों ना फिर से वो बचपन की याद को दोहराया जाए । हालांकि दादी अब चारपाई तक सीमित रह गई हैं और अपनी वृद्धावस्था यापन कर रही हैं । अब बोलती नहीं हैं , खुद से उठ भी नहीं पाती । लेकिन इस अवस्था में भी उनसे तिलक लगवाने की लालसा ने मुझे घर का टिकट कराने के लिए बाध्य कर दिया । घर में बिना किसी को बताए मैंने टिकट करा लिया और घर आने को तैयार हो गया । जन्मदिन से दो दिन पहले मैं अचानक घर पहुंचा तो किसी को भी यकीन नहीं हुआ । दादी के पास बैठा और पूरे यकीन से पूछा कि - " हम के हयी माई ? " , मुझे पता था दादी नही बता पाएंगी । दादी ने कुछ ही वक्त लिया होगा ...

Yuddha

Aaj aag Hai,Aaj man me mere aag Hai , Andar hi antardwand Hai, khud me hi tadap raha Hu main Sharir Agni se jal utha , Main Aaj dwesh se tap utha Mastishk me samahit cheshta se, mere rag rag me bhay utha Sapno ke tut Jane ki laptein mjhe dara rahi, khud ke piche reh Jane ki jwala mjhe kanpa rahi Ye yuddha Hai veeron ka, Ismeim virgati bhi haar Hai, Auron se main Jo darr jaun, Ye mjhe Na swikar Hai Haar se main darta Nahi, Par man Mera udas Hai Jo Paas tha wo dur ab, Jo dur tha ab Paas Hai, Hatotshah tha, nirash tha, Jo thoda aatmvishwash tha, Gussa mjhe Aata Hai ab, Thoda aas tha , ab faas Hai , Ab jal ke Agni me, Tap ke aana bardasht Hai, Ab Jeet jaun khud se main, Abhimaan ki yahi haar Hai , Man me Jo takrar thi, Abhi tak barkarar Hai , Mehnat me jiske kami Nahi, to smjho nauka Paar Hai, Mjhe Maan kar kamzor, Tune ki Badi se chuk Hai, Hey Shatru ,Tu ye bhul gya, mjhme Abhi bhi bhukh hai Giri mansiktaon pe , mjhe dukh Hai, Intezzar kar main aaunga , yahi Mera...